ऐ काश फिर वो मौसम वो लम्हे लौटे
खो जाया करते थे जिसमे हम बैठे बैठे
न होती थी तकरार कभी न कभी लड़ाई
प्यार की अपनी एक दुनिया थी सजाई
कब रात दिन में,दिन रात में ढलते थे
खामोशियों में हम तुझे सुना करते थे
कुछ अलग दुनिया हो चली थी अपनी
सपने हकीक़त में तब्दील हो रहे थे
इश्क दीवानगी से जूनून हो चला था
वर्क वर्क पे तेरा नाम हमने खुदा लिखा था !!
हर आरजू अधूरी,हर तमन्ना अधूरी
कुछ हम अधूरे,कुछ हमारी कहानी अधूरी
चाँद को पाने की मेरी चाहत अधूरी
वो चाँद नहीं तो ये चांदनी अधूरी
मौसम में अदाएं लगे बिन तेरे अधूरी
बगैर तेरे उसकी शोकी उसकी रवानी अधूरी
हो साथ तुम मेरे तो लगता है हूँ मैं पूरी
जो तुम साथ नही तो ये जवानी अधूरी
तेरे फरेब ने मेरी तमन्नाएं कुचली
तेरी मोहब्बत की हर वो निशानी अधूरी
पल पल बदलती छलती इस दुनिया में
मैं अकेली और तेरी मुझपर मेहेरबानी अधूरी!!